गुरुवार, 14 जून 2012

मन अम्बर


ॠता शेखर ‘मधु
1
आखर-मोती बिखरें
मधुरिम  भाव सजे
मन अम्बर -सा निखरे ।
 2
है जग की रीत यही ।
मीठी वाणी से
दिल में  है प्रीत बही  ।
3
कुछ खर्च नहीं होता
मीठा बोल  सदा
स्नेहिल रिश्ते बोता
 4
ओ बादल मतवाले
प्यासी है धरती
, उसको अपना ले  ।
5
किरणें रवि की आईं
खिलखिल करता दिन
कलियाँ भी मुसकाईं ।
 6
दो हाथ जुड़े रहते
बल और विनय का
हैं भाव सदा कहते  ।
7
अंक बराबर पाते
कर्म-बही में तो
ना होते हैं नाते 
 8
तितली उड़ती जाती
फूल भरी चूनर
धरती की लहराती ।
 9
चाह रखो चलने की
हारेगी बाधा
राह मिले खिलने की ।
-0-

8 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

भावपूर्ण रचनाएँ

ज्योत्स्ना शर्मा ने कहा…

बहुत प्यारे भावों से भरे एक से बढ़ कर एक माहिया हैं.....किसे सबसे अच्छा कहूँ समझ नही आया ....बहुत बधाई आपको

sushila ने कहा…

अत्यंत सार्थक और बहुत ही सुंदर माहिया।सभी एक से बढ़कर एक! बधाई ॠता शेखर ‘मधु’ जी!

Dr.Bhawna ने कहा…

ओ बादल मतवाले
प्यासी है धरती
आ, उसको अपना ले ।
pyaar se labalab ye mahiya bahut khub likha aapne aapko dheron badhai..

ऋता शेखर 'मधु' ने कहा…

आपसब की उत्साहवर्धक टिप्पणियों से बहुत खुश हूँ...
माहिया में मेरा प्रथम प्रयास था...आपसब को पसन्द आई...आभार !!
काम्बोज सर की आभारी हूँ जिन्होंने लिखने का नियम बताया |
सादर

अनाम ने कहा…

प्रत्येक रचना भावपूर्ण बधाई हो
कृष्णा वर्मा

amita kaundal ने कहा…

रीता जी बहुत सुंदर माहिया हैं एक से बढ़ कर एक.

अंक बराबर पाते

कर्म-बही में तो

ना होते हैं नाते ।

बहुत ही सुंदर लिखा है

बधाई,

अमिता कौंडल

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

ऋता जी, बहुत प्यारे माहिया लिखे हैं...। हार्दिक बधाई...।