मंगलवार, 20 नवंबर 2012

कार्तिक माह (चोका)

रेनू चन्द्रा
कार्तिक मास
तड़के उठ कर
स्नान- पूजन
देव- आरती करूँ
श्रद्धापूर्वक
तुलसी को दीपक
जलाकर मैं
मन में आस धरूँ

तुलसी ब्याह करूँ।

      

सोमवार, 19 नवंबर 2012

सर्द मौसम-सेदोका


1
खरगोश- सी
दौड़ती पुरवाई
 खुशबू भर लाई
मौसम पर
 झूमती लहराई
सरदी बन आई ।
 2
 पाहुन बन
 सरदी थी उतरी
 परिणीता सी छूती
 पावन धरा
 फूलों को रंग कर
 तितली -सी उड़ती
 3
 सूर्य निकला
 दौड़ी गिलहरियाँ
 धूप के टुकड़ों की
 हरे पत्तों पे
 चहके पंछी संग
अँधेरों को चीरती
4
पाखी कुहुके
फिरकी सी घूमती
चली पुरवाई थी
 घोड़े सर्दी के
 दौड़ाती आई थी
 बर्फानी- सी पसरी
 5
 सर्द मौसम
 रस ओंठ खुले थे
 मधु पराग भरे
 नव कलिका
 फूल बन करके
 तितलियाँ बुलाती ।
 6
 नीलवर्ण है
 उन्मन- सी सरदी
उड़ी पंख फैलाए ,
 जैसे विहग
 धूप का ओढ़े शाल
 हवा के संग संग
--डॉ सरस्वती माथुर

गुरुवार, 15 नवंबर 2012

जीवन ठहर गया


माहिया
सुदर्शन रत्नाकर
1
पानी तो खारा है
याद  सदा करती
तुमने ना जाना है
 2
ये नदियाँ बहती हैं
सागर से मिलने
कितने दुख सहती हैं
3
काजल की रेखा है
आगे क्या होगा
किसने यह देखा है
4
तुम दूर नहीं  जाना
गर जाते हो तो?
फिर याद नहीं ना ।
5
ये बंधन झूठे हैं
क्यों विश्वास करूँ
साजन जो रूठे हैं
6
आशा अब टूट गई
जीवन ठहर गया
साँसें जब छूट गईं .
7
यूँ मत वक्त गंवाओ
जब तक साँसें हैं
कुछ तो करते जाओ
8
क्यों दु सहते हो
मत अभिमान करो
साथ नहीं रहते हो
9
सूरज तो डूबेगा
मत घबरा साथी
चन्दा भी निकले गा
10
पानी में कमल खिला
तुम कुछ कहते तो
हमको होता न  गिला
-0-
ताँका
1- कमला निखुर्पा 
आँचल फैला  
रब से माँगूँ दुआ 
खुशी बरसे 
तेरे घर अँगना 
छूटे कभी संग ना ।
-0-
 2-रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'
मेरी बहना 
जनम -जनम की 
तू है दर्पन 
तुझमें दिखता है 
 मुझे अपना मन ।
 -0-


मंगलवार, 13 नवंबर 2012

-बाती बोली यूँ-


1-बाती बोली यूँ-
डॉ सुधा गुप्ता

बाती बोली यूँ
मुझसे मत पूछो
मैं जलती क्यों
स्नेह भरे दीपक
जा कूदी थी मैं
तनमन भिगोया
प्रेमकुण्ड में
ऐसी डुबकी मारी
सुधि बिसरा
हुई उसीकी सारी
गहरे डूबी
कुछ बूझ न पाई
वजूद खोया
भोलासा मेरा मन
रूई उजला
नेह में भीगा तन
लौने जो छुआ
भक्क से जल उठी
प्रेममगन
तनमन अगन
बस तभी से
रातदिन जली मैं
मेरा कहना
मानो तुम बहना
प्रेमप्रीत में
अतिशय डूबना
बहुत बुरा
कभी न डूबो पूरे
नित्य जलोगे
सदा पीर सहोगे
मैं बाती सहती ज्यों
-0-
2- दीप जलाऊँ--डॉ भावना कुँअर

दीप जलाऊँ
दीपावली मनाऊँ
भावों -से भरा
एक नन्हा- सा दीया
लेकर चलूँ
और मिलके आऊँ
बेबस माँ से
जिसका साथी बस
एकाकीपन
दे आऊँ समेटके
कुछ खुशियाँ
तब घर जाकर 
दीप जलाऊँ ।
मिठाई,पकवान
चमचमाते
मैं लेकर खिलौने
नन्हें मासूम
बेघर,मजबूर
प्यारे बच्चों की
बिखरी वो मुस्कान
लौटा के लाऊँ
तब मन से फिर 
दीप जलाऊँ ।
उजड़े -से बंजर
खलिहानों में
बरसे पानी,ऐसी
जी भर कर
मैं गुहार लगा लूँ
तब दीपक
खुशियों के जलाऊँ
दीपावली मनाऊँ । 
-0-
3-हरकीरत 'हीर'
तेरे लिए हैं
प्रिय दीप जलाए
तेरे लिए ही
अरमान सजे ये 
तेरे लिए ही
आँगन ज्योत सजी
तेरे लिए ही
देख बाती जगी ये
सजी रंगोली
तेरे लिए साजन
वन्दनवार
हँसी  तेरी खातिर
तेरे लिए ये
उतरे हैं सितारे
तेरी खातिर
आँखों से अश्क बहे
तेरी खातिर
हवा खामोश रही
तेरे लिए ही 
चाँद छुपा आज है
तेरी खातिर
देख रात सजी है
जले उदास
दीपक गुमसुम
लिख दो पाँति
प्रेम की फिर तुम
भर दो मीठी
प्रीत की सरगम
बिन प्रीत के
पिया जले न दीप
दिल में है अँधेरा ...!!
-0-

दीपों की फुलवारी


4- डॉ सरस्वती माथुर
रंग -बिरंगी
दीपों की फुलवारी
छटा निराली
है रंग सतरंगी
रसपगी- सी
मधुरिम दीवाली
अँधेरी रात
अनारी लड़ियों में
लगती न्यारी
फुलझड़ी झरती
चाँदी -फूल- सी
झिलमिल करती
तारों की जाली
नभ पर टँगी हैं
जैसे कंदीलें
अब आएगी लक्ष्मी
ले खुशहाली
चलो  दीप जलाओ  
ज्योति पर्व मनाओ ।
-0-
5-शशि पुरवार
रिश्तों में खास   
विश्वास की मिठास
प्रेम की बाती 
रौशनी की बहार
बाँटें खुशियाँ
हर दिन त्योहार
हीरे से ज्यादा
अनमोल है प्यार
है जमा  पूँजी
रिश्तों की सौगात
साजन संग  
बसाया है संसार
नए बंधन
स्नेहिल उपहार
दिलों की प्रीत
अमूल्य पतवार
मन ,उमंग
शीतलता व्याप्त
पल - पल हो
घर मने दिवाली
हर दिन त्योहार।
-0-
6-मंजु गुप्ता
दीवाली पर 
मन रौशन कर 
खुशी  बिखेरी 
 शुभ मुहूर्त पर 
लक्ष्मी की पूजा 
करते भारतीय 
राम - रावण
युद्ध का इतिहास 
पुराणों में है -
राम ने व्यभिचार 
अनाचार  का 
किया जड़ से नाश 
तम था हारा 
राम  का सत्य -धर्म 
विजयी हुआ 
आदर्शों का उजाला 
राम ने किया 
राम के स्वागत में 
अयोध्या में थे
दीप जगमगाए 
अधर्म पर 
धर्म की जीत हुई 
ज्योति पर्व 
तब से आज तक 
हम सब मनाते .
-0-

आँखों में दीप जले




1-
डॉ सरस्वती माथुर
1
आँखों में दीप जले
नभ के चंदा -सा
आ जाना शाम ढले 
2
दीपो में बाती है
यादो की पूनी
मैने भी काती है  ।
3
मन -चौरे दीप जले
तू भी आ जाना
जैसे ही शाम ढले  ।
4
खेतों में बाली है
तू भी आ जाना ।
सब ओर दिवाली है  ।
5
दीपक की झिलमिल है
काली रातों में
पूनम-सी महफ़िल है
6
घर -घर में दीप जले
काली रातों में
कैसे हम आज मिले ?
-0-
2-ज्योतिर्मयी पन्त
1
मन आशा- दीप जले
शुभ दिन आएगा
सबके दुख दर्द टलें ।
2
दीवाली आई है
जगमग दीप जलें
खुशहाली लाई है ।
-0-