बुधवार, 2 जनवरी 2013

ज्योति-वन्दन


डॉ सुधा गुप्ता
1
ज्योति-वन्दन
करो अभिवन्दन
मने आलोक -पर्व
नूतन वर्ष
निबिड़  तिमिर का
कर दो गर्व खर्व
2
नया हर्ष है
नव उमंग -संग
पुलक-भरा तन
नया वर्ष है
नूतन है निश्चय
लो , छूटा विमर्ष है।
3
छोड़ पुराना
गहो नवल मन !
बिसराकर तम
केंचुल त्यागो
जीर्ण-शीर्ण हो गई
राह बुलाती नई
4
चाह अजानी
औचक ही छू गई
बीज नया बो गई
लिखूँ कहानी :
हर बच्चे के हाथ
कलम हो सुहानी
5
हाथ से छूटे
कचरा टटोलता
टाट का लम्बा बोरा,
साफ़-सुथरा
रोटी की चिन्ता-मुक्त
स्कूल को जाए बच्चा ।
-0-

-0-
2-रेनु चन्द्रा माथुर
1
बीता है साल
नव वर्ष है आया
पाकर नई  आभा
जहाँ  रौशन
अँधेरा घबराया
वो फिर नहीं लौटा ।
2
नव प्रभात
लाया यह सौगात
उमंग सब ओर
सुख समृद्धि
खेतों में लहराई
जन-जन हर्षाया।
     -0-

5 टिप्‍पणियां:

अनाम ने कहा…

डॉ सुधा गुप्ता जी के बहुत सुंदर सेदोका ...बधाई ..!
रेनू .चन्द्र जी
जहाँ रौशन
अँधेरा घबराया
वो फिर नहीं लौटा ।
अँधेरा घबराया....? इसका अर्थ कुछ स्पष्ट नहीं हुआ ? मंजू

ज्योत्स्ना शर्मा ने कहा…

नई आशा ,उमंग और ऊर्जा का संचार करते, नई राह का निर्माण करते बहुत सुन्दर सेदोका ...आदरणीया दीदी और रेनू जी को बहुत बहुत बधाई ...शुभ नव वर्ष !
सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

Manju Gupta ने कहा…

रेणुजी और सुधा जी सुंदर, नव - नव भावों - तरंगों से रचा -पगा सेदोका .

नववर्ष २०१३ हार्दिक बधाई

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

बहुत ही अच्छे सेदोका है...| आदरणीय सुधा जी व रेनू जी को बधाई..|
प्रियंका

Dr.Bhawna ने कहा…

चाह अजानी
औचक ही छू गई
बीज नया बो गई
लिखूँ कहानी :
हर बच्चे के हाथ
कलम हो सुहानी ।

Bahut achchhe bhaav hain is rachna ke,sabhi rachnaye eakse badhkar eak hain...aap dono ko hardik badhai.....