मंगलवार, 27 अगस्त 2013

कुछ स्नेहमय क्षण-1

हिन्दी हाइकु और त्रिवेणी से जुड़ा परिवार विश्व भर में फैला  है । सभी एक दूसरे से आत्मीयता होने के कारण मिलना भी चाहते हैं। कुछ ने उन पलों को आपस में आदान -प्रदान करने  का प्रयास किया है।हम अपने सभी आत्मीयजन के आभारी हैं, जो एक दूसरे का सम्मान करते हैं , आत्मीयता का निर्वाह करते हैं। इस सप्ताह सबसे मिलवाने का यह आयोजन शुरू किया जा रहा है।

डॉ हरदीप सन्धु-रामेश्वर काम्बोज हिमांशु
आत्मीय क्षण
दिल्ली -14 जनवरी -2012
संगीता स्वरूप , मंजु मिश्रा, डॉ अनीता कपूर, रामेश्वर काम्बोज हिमांशु ,सुभाष नीरव 

-0-
मेरठ -31मार्च-2012

डॉ सुधा गुप्ता-डॉ भावना कुँअर 



ऐश्वर्या कुँअर-डॉ सुधा गुप्ता-डॉ भावना कुँअर 

 माशा अग्रवाल , डॉ अर्पिता अग्रावल , डॉ सुधा गुप्ता ,डॉ भावना कुँअर 
-0-


20 मई -2012,

डॉ सुधा गुप्ता,  डॉ ज्योत्स्ना शर्मा,

दिल्ली -12 जून -2013 काम्बोज-निवास,
 'उजास साथ रखना '( चोका-संग्रह)की पहली प्रति के साथ





अनिता ललित ( लखनऊ), रामेश्वर काम्बोज हिमांशु

13 टिप्‍पणियां:

मंजुल भटनागर ने कहा…

सुन्दर चित्र ,मंजुल

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

इस स्नेह और परिचय के लिए आभार .... हिमांशु जी की आभारी हूँ जिनहोने मुझे हाइकु परिवार में शामिल होने का अवसर दिया ।

ज्योति-कलश ने कहा…

इतने सुन्दर आयोजन के लिए बहुत बहुत आभार आपका ....खुद को यहाँ देखना बहुत सुखद है .....ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि ....

पालनहार !
आत्मीयता से भरे
पलों के ऐसे हार
स्नेह अपार
त्रिवेणी की वेणी में
गूँथना बार बार ....बहुत शुभ कामनाएँ ..कि ..ऐसे ही सबसे मिल पाएँ ...:)

सादर
ज्योत्स्ना शर्मा

त्रिवेणी ने कहा…

हिंदी हाइकु तथा त्रिवेणी अब मात्र दो पत्रिकाएँ ही नहीं है बल्कि इनसे जुड़े रचनाकार एक बड़े परिवार का हिस्सा है । यह परिवार पूरे विश्व में फैला हुआ है । भले ही इस परिवार के सदस्य एक दूसरे से कभी न भी मिले हों, मगर वे सब आत्मीयता से बँधे हैं और कभी एक दूसरे से दूर नहीं हैं ।
जब कभी ईश्वर हमें ऐसे अवसर प्रदान करता है जहाँ हम एक दूसरे से सचमुच मिलते हैं , तो हमारे लिए ये पावन क्षण अनमोल बन जाते हैं; जिनको यादों की पिटारी में हम जीवन भर संजोए रखते हैं । कुछ ऐसे ही लम्हे इन चित्रों में देखने को मिले हैं । जब मैं ये देख रही थी, तो मैं केवल इनको देख ही नहीं रही थी बल्कि अपने -आपको इनमें शामिल किए हुए भावों के संग बहती चली जा रही थी।ईश्वर से प्रार्थना करती हूँ कि ऐसे पल बार -बार प्रदान करे और हम सबको यूँ ही मिलाता रहे !
डॉ हरदीप सन्धु

Manju Gupta ने कहा…

जी हाँ इन पत्रिकाओं के परिवारों द्वारा सभी से मेरा घरोबा- सा हो गया . अब इन अनमोल तस्वीरों द्वारा आत्मिक मिलन भी हो गया . ऐसा लग रहा है कि हम उनसे रूबरू भी हो गए .

जोड़ने की ताकत का , देखो होय कमाल .

त्रिवेणी - हाइकु का है , जग में मचा धमाल .

सुखद अनुभूतियों के लिए मंगल , अनंत शुभकामनाओं के साथ

मंजू गुप्ता



Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

अपने इस 'हिन्दी हाइकु व त्रिवेणी परिवार' में मुझे इतनी प्यारी जगह मिली... इसके लिए मैं आप सभी की आभारी हूँ... विशेषकर आदरणीय स्नेही हिमांशु भैया जी की व हरदीप दीदी जी की ! साथ ही ममतामयी प्रिय वीरबाला भाभी जी की ! हिमांशु भैया व भाभी जी से मिलने का सौभाग्य तो प्राप्त हुआ ... मगर हरदीप दीदी से तथा इस परिवार से जुड़े सभी रचनाकारों से मिलने की बहुत इच्छा है ! हिमांशु भैया व भाभी जी मिलकर लगा ही नहीं कि पहली बार मिले हैं.... !
हमारा ये पावन रिश्ता सदा फलता फूलता रहे...तथा आपकी छत्र-छाया में हम इसी तरह आगे बढ़ते ~आपसे इसी आशीर्वाद के अभिलाषी हैं..... :-)
~हार्दिक आभार व शुभकामनाओं सहित
~अनिता ललित

Dr.Anita Kapoor ने कहा…

सुखद अनुभूति....इसके लिए मैं आप की आभारी हूँ..आपकी छत्र-छाया में हम इसी तरह आगे बढ़ते आपसे इसी आशीर्वाद के अभिलाषी हैं..आपको और हरदीप जी को इस अनूठे प्रयास और सोच के लिए बधाई।

Krishna ने कहा…

हिन्दी हाइकु तथा त्रिवेणी परिवार के कुछ सदस्यों से यूँ मुलाकात होगी सोचा ना था। इतने आत्मीयता से भरे सुन्दर चित्र देख कर मन गदगद हो उठा। सन २०११ में पहली बार कनेडा की हिन्दी साहित्य की संस्था "हिन्दी राइटर्स गिल्ड" की मासिक गोष्ठी में आदरणीय हिमांशु जी को मिलने और सुनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। आज भी याद है कि उन्होंने आदरणीय सुधा गुप्ता जी की पुस्तक से बहुत से हाइकु पढ़ कर सुनाए थे। और इस विधा के विषय में कितना विस्तार से समझाया था। भाईसाहब आपके स्नेह ने कब मुझे इस परिवार से जोड़ दिया पता भी ना चला। इसके लिए मैं सदैव आपकी आभारी रहूँगी। कामना करती हूँ कि यह परिवार आपकी तथा हरदीप जी की छ्त्र-छाया में यूँही सदा पनपता रहे।
अनंत शुभकामनाओं सहित

कृष्णा वर्मा

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

क्या कहूँ...अभिभूत हूँ इन चित्रों को देख कर...| सच में, इस परिवार के सदस्यों से मिलने का हम में से शायद हर किसी की हार्दिक इच्छा होगी...| खास तौर से आदरणीय कम्बोज जी और हरदीप जी से, जिनकी वजह से हम जैसे न जाने कितने लोग इस परिवार का हिस्सा बन सके...|
इन चित्रों को साँझा करने के लिए बहुत आभार...| आगे भी ऐसे कुछ यादगार पलों का इंतज़ार रहेगा...|
प्रियंका

Dr.Bhawna ने कहा…

बहुत अच्छा लगा त्रिवेणी परिवार को एक साथ देखकर बहुत कुछ लिखने का मन था पर हाथ दर्द कुछ करने दे तब ना खैर हम सब यूँ मिलजुल कर रहें और साहित्यिक जगत में एक नयी रोशनी लायें इन्हीं शुभकामनाओं के साथ सबको हार्दिक बधाई...

shashi purwar ने कहा…

सबको एक साथ देखना एक सुखद अनुभुति हो रही है.यह परिवार है ही इतना प्यारा. शुभकामनाये .

Manju Mishra ने कहा…

यादगार पलों के बहुत ही सुन्दर चित्र ।

इस परिवार में शामिल होना मेरा सौभाग्य है। दिल्ली में आप सब से मिलना सचमुच बहुत सुखद अनुभव था। ऐसे ही और क्षणों की प्रतीक्षा रहेगी। मेरठ में डॉ सुधा गुप्ता जी के साथ भी मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उस मुलाकात के भी कुछ चित्र शीघ्र ही आप सब से शेयर करुँगी।
सादर
मंजु

Subhash Chandra Lakhera ने कहा…

ऐसी मीठी यादें जीवन को जो सम्पूर्णता प्रदान करती हैं, वह अनमोल है। स्नेह धागों को मजबूती देती हैं। आप सभी को हार्दिक शुभकामनायें, सदैव बनी रहें अपनत्व की ये भावनाएं !- सुभाष लखेड़ा