रविवार, 28 जुलाई 2013

जो कुछ बोया है


सुदर्शन रत्नाकर
1
बादल ये बरसे हैं
धरती भीग गई
सबके मन सरसे हैं ।
2
सपने तो सपने हैं
दु:ख में  साथ रहें
वे ही तो अपने हैं ।
3
अम्बर में तारे हैं
दुनिया सोती है
ये दुख के मारे हैं ।
4
लो  चिड़िया चहकी है
तुम जो आए तो
यह बगिया महकी है ।
5
ईश्वर की माया है
जो कुछ बोया है
वो ही तो  पाया है ।

-0-

शनिवार, 27 जुलाई 2013

विदीर्ण धरा

पुष्पा मेहरा
1
रोपे थे बीज
सोचा झूमेगी क्यारी
होंगे ढेरों प्रसून,
उगी न पौध
खिला न कोई फूल
सूखी पड़ी थी  क्यारी।
2
यहाँ से वहाँ,
फैली विदीर्ण धरा
निहारती अम्बर,
बोली फफक-
 प्यासी मैं रह गई
बुझा दो मेरी तृष्णा।
3
चलते  चलें
घट ले, दूर कहीं
खोज लें कूप भरा,
जा बसें जहाँ-
न हो कोई तृषित
तृप्त रहें अधर।
4
कौन हो तुम !
सुन, बोली- श्रावणी
नभ- मंडल वासी-
घटाएँ हैं हम
सजाएँगी  धरणि
हरषायेंगी  मन।
5
वादियाँ कहें
आपस में रो-रो के-
घनी पीड़ा दे गया
फफोला बड़ा-
फूटा, तन्नाया- बहा

तीर किसने मारा !

गुरुवार, 25 जुलाई 2013

यूँ बदले मौसम

1-ॠता शेखर ‘मधु’
1
सावन की हरियाली
बूँदों की छमछम
ले आई  खुशहाली ।
2
झमझम बरसा पानी
सावन की दुल्हन
ओढ़े चुनरी धानी ।
-0-
2-शशि पुरवार
1
क्यूँ तुम खामोश रहे
पहले कौन कहे
दोनों ही तड़प सहें ।
2
आसान नहीं राहें
पग- पग पे  धोखा
थामी तेरी बाहें ।
3
सतरंगी यह जीवन
राही चलता जा
बहुरंगी तेरा मन ।
4
साँचे ही करम करो
छल करना छोड़ो
उजियारे रंग भरो ।
5
बीते कल की बतियाँ
महकाती यादें
है आँखों में रतियाँ ।
6
ये  पीर पुरानी है 
यूँ बदले  मौसम  
खुशियाँ नूरानी है  ।
-0-


मंगलवार, 23 जुलाई 2013

सावन क्या आया

माहिया
1-कृष्णा वर्मा
1
झम-झम बादल बरसा
सूने हैं नैना
मन रह-रह कर  तरसा ।
2
लो सावन क्या आया
नदिया झूम उठी
फिर से यौवन छाया।
-0-
2-डॉ सरस्वती माथुर 
1
मन मेरा सावन  है ।
हम तुम साथ रहें
मौसम  मनभावन  है ।  
-0-
सेदोका
अरुण कुमार रुहेला 
1
इन्द्रधनुष 
हर नभ -मन में 
भरे रंग संगीत ,
जीवन नाचे  
गाती मधुर गीत  
पानी की हर बूँद ।
2
बादल प्यासा 
रुका मरुभूमि में 
पाने जीवन-जल, 
था दृष्टिभ्रम 
जलद खूब रोया
और बाँटा जीवन ।
-0-



सोमवार, 22 जुलाई 2013

जग-जीवन

पुष्पा मेहरा
1
जग-जीवन
बिन पतवार-मैं
पाना चाहूँ साहिल
मँझधार में
बह रही है नाव
प्रभु तेरा सहारा।
2
वासना-जल
लिये मन में फिरूँ
डूबी सदा तन्द्रा में
सोचा इतना-
निर्मल-सरिता सी
बहूँ जग-धारा में।
3
लिए मैं पानी
उड़ती मैं हवा-सी
दुर्गम-पथ-हारी
देख आपदा
काँप गई  भय से
हो गई पानी-पानी।
 4
जीवन-जल
डाला था भाव-भँवर   
उठने लगा ज्वार ,
थामे न थमा
निकला था वेग ले
प्रवाह बन बहा ।
-0-

      

शनिवार, 20 जुलाई 2013

हम इतना याद करें

डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 
1
सजना का गोरी से
बाँध गई मनवा 
चाहत इक डोरी से ।
2
क्या फूल यहाँ महकें 
ज़हर हवाओं में 
पंछी कैसे चहकें ।
3 
ये रात बहुत काली 
है कितना गाफिल 
इस बगिया का माली ।
4
गुलज़ार कतारें थीं 
ख़्वाब तभी टूटा 
जब पास बहारें थीं ।
5
रुख मोड़ लिया हमने 
कल की बातों को 
कल छोड़ दिया हमने ।
6
हर दिन अरदास करूँ 
कौन यहाँ, कान्हा !
मैं जिसकी आस करूँ ।
7
हम इतना याद करें 
रुकतीं  ना हिचकी 
वो फिर फ़रियाद करें ।

बुधवार, 17 जुलाई 2013

सब वही है

ताँका
सतीशराज पुष्करणा
1
सावन माह
आया समय पर
हुआ क्या लाभ ?
अगर झूमकर
पानी नहीं बरसा।
2
सागर क्या है
वो क्या जान पाएगा,
आज तक जो
बाहर नहीं आया 
आँगन के कुएँ से ।
3
उन्हें कोई भी
पकड़ लेगा कैसे
वो तो आज भी
काफ़ी लम्बे -चौड़े हैं
क़ानून  के हाथों  से ।
4
बादल आया
बूँदों को बरसाने
किसने फोड़ा
नाराज़ बादल को
बहा दिए शहर ।
5
बूढ़े चाँद की
नीयत ज़रा देखो-
देखा करता
उनके चेहरे को
बादलों की ओट से ।
6
सब वही है
पर क्या कहें हम
पापा के जाते
सूर्य -सी रौशन माँ
अब रात हो गई ।
-0-


मंगलवार, 16 जुलाई 2013

तेरा ख़याल आया !

हरकीरत हीर
1
खूँटी पे टँगा
हँसता है विश्वास
चौंक जाती धरा भी
देख खुदाया !
तेरे किये हक़ औ'
नसीबों के हिसाब ...!
2
स्याह- से लफ़्ज
दुआएँ माँगते हैं
ज़र्द -सी ख़ामोशी में ,
लिपटी रात
उतरी है छाती में
आज दर्द के साथ ....!
3
आग का रंग
मेरे लिबास पर
लहू सेक रहा है
कैद साँसों में
रात मुस्कुराई है
कब्र उठा लाई है ।.
4
दागी जाती है
इज्जत के नेजे पे
बेजायका सी देह
चखी जाती है
झूठी मुस्कान संग
दर्द के बिस्तर पे ।
5
कैसी आवाजें
अँधेरे की पीठ पे
बदन को छू गईं !
नज़्म उतरी ,
तड़पकर आज
तेरा ख़याल आया !
-0-


प्यार का झरे पानी

1-शशि पुरवार
1
बहता पानी 
विचारो की रवानी 
हसीं ये जिंदगानी
संझा  -बेला में 
परिवार का साथ
ज्यों संस्कारों के हाथ ।
2
हाथों  में छैनी 
तिरते है विचार
बेजोड़  शिल्पकारी
गढ़े आकार
माथे पे स्वेद बिन्दु 
शिला हुई जीवन्त ।
3
जग  कहता-
है पत्थर के पिता 
समेटे परिवार  
कुटुंब खास 
प्यार का  झरे पानी 
पिता की है कहानी ।
-0-
1-डॉ सरस्वती माथुर 
1
पानी- सा मन
मौसम में घुल के
टपकता ही रहा
बूँदें छ्नकीं
गौरी के पायल सी
चूड़ियाँ भी खनकी
-0-


रविवार, 14 जुलाई 2013

मौसम पानी -पानी ।

1-डॉ. ज्योत्स्ना शर्मा 
1
रुत सावन 
आवारा- सा बादल 
है धरा भी दीवानी 
मिलन-कथा 
देखी और हो गया 
मौसम पानी -पानी ।
2
सजानी हमें 
कलियों से क्यारियाँ 
वो बो आए खंज़र ,
सरस स्वप्न 
कैसे उगें ,आँखों का 
पानी हुआ बेघर ।
-0-
2-अनिता ललित
1
 आँखों में पानी
क्यूँ भर-भर आए?
देखे ना सुख-दु:ख,
छलक जाए !
ये प्रेम-उपहार
है जीवन का सार!

2
बहता पानी
ये जीवन कहानी
ज्वार-भाटा के बीच,
थके ना हारे
हर लहर पर
लिखे नाम  रवानी !
-0-
3-भावना सक्सैना
1
पानी के संग
बहता था जीवन
रंगों से भरा घट,
बना क्यूँ वही
अचानक प्रलय
बहा ले गया सब?
-0-
4-राजीव गोयल
1
सँभल जा तू
गुज़रा हुआ वक़्त
नहीं हाथ आएगा
पछताएगा
पानी सर से ऊँचा
गर चला जाएगा
-0 -
5-मंजू गुप्ता 
1
दीवाना मेघ 
बारिश  को  क्या जाने ?
किसको है बचाना ?
किस धरा को ?
खुशियों  का पानी दे
किसको रुलाना है ।
2
मेघदूत - सा 
परकाज लेकर 
पहुँचा प्रिया पास ,
पढ़ा संदेशा 
आँखों में पानी भर 
 यादें  घटा -सी छाईं।
-0-
6-ज्योतिर्मयी पन्त
1
शुभ  चिन्तन

आन -बान औ शान
रिश्तों का हो  सम्मान
पानीदार हों
लोगों के अंतर्मन
मोती -सा हो जीवन ।
2
 नयन- जल
कर देता निर्मल
हँसी -ख़ुशी के पल
गिले - शिकवे
सब धुल ,  बहते
 टूटे दिल जुड़ते ।
-0-