सुदर्शन रत्नाकर
1
बादल ये बरसे
हैं
धरती भीग गई
सबके मन सरसे हैं
।
2
सपने तो सपने हैं
दु:ख में साथ रहें
वे ही तो अपने
हैं ।
3
अम्बर में तारे हैं
दुनिया सोती है
ये दुख के
मारे हैं ।
4
लो चिड़िया चहकी
है
तुम जो आए तो
यह बगिया महकी है
।
5
ईश्वर की माया है
जो कुछ बोया है
वो ही तो पाया है
।
-0-