सोमवार, 15 अक्तूबर 2012

विदा की घड़ी /मेरा मन बोले-


चोका
विदा की घड़ी- डॉ हरदीप  सन्धु
 लाडो बिटिया
होने लगी ज्यों विदा
न आँसू बहा
तुझे जाना ही होगा
न वश मेरे
तेरा वश भी आज
नहीं चलेगा
तुम हो मन मोती
किसी और का
छुपाकर हमने
दिल में रखा
आज गुडिया तेरी
बैठी उदास
चुप नीर बहाए
यूँ तेरे बिन

कौन उसे खिलाए
कैसी ये घडी
रौनक तू ले चली
त्रिंजण सूना
सखियाँ भी चुप हैं
माँ- हृदय भी
अब डोलने लगा
बाबुल कैसे
झेले तेरी जुदाई
क्यों भर आईं
सबकी ये आँखियाँ
धन पराया
क्यों होती हैं बिटिया
क्यों दस्तूर बनाया ?

-0-
माहिया- डॉ सरस्वती माथुर
1
है मौसम हरियाला
वर्षा की बूँदें
हमको लगती हाला  ।
2
काली ये रातें हैं
मन दीप जला के
करनी कुछ बातें हैं ।
तुम मेरे हो जाना
नींदें लेकर तुम
सपनो में खो जाना।
4
मेरी तू नैया है
पार लगा देना
तू मेरा सैयां है ।
5
सपने हैं नैनो में
नींद नहीं आती
मन तडपे रैनो में ।
6
दिल दिल से मिल जाता
मेरा मन बोले-
‘तू मुझ से मिल जाता।’   

-0-

12 टिप्‍पणियां:

sushila ने कहा…

मन को भिगो गया डॉ हरदीप सन्धु का चोका
विदा की घड़ी- बहुत भावप्रवण और खूबसूरत !

सरस्वती जी के माहिया भी पसंद आए ।

Dr.Bhawna ने कहा…

sundar abhivyakti....bahut2 badhai...

Arvind Jangid ने कहा…

बहुत सुन्दर भाव

अनाम ने कहा…

Bahut hee sunder choka ,man ko gehrai se choo gaya . Hardeepji, bahut bahut Badhaaee .Padh kar dil bhar aaya!
" Mahiya" ke liye Abhaar!
Dr Saraswati Mathur

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

हरदीप जी के चोका से बेटी की विदाई का दृश्य आँखों में घूम गया। बहुत सुन्दर और भावुक चोका, बधाई।
सरस्वती जी के सभी माहिया बहुत अच्छे लगे, बधाई।

Krishna Verma ने कहा…

हरदीप जी मार्मिक चोका। सरस्वती जी सभी सुन्दर महिया।
आप दोनों को बधाई।

Rachana ने कहा…

bitiya ki bidai kaese karungi yahi sochne lagi meto sunder chitr ukere hai aapne
mahiya ke kya kahne bhavon ka sagar hai usme
aapdono ko badhai

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

धन पराया
क्यों होती हैं बिटिया
क्यों दस्तूर बनाया ?
ये सवाल कभी न कभी हर बेटी या बेटी की माँ के मन में ज़रूर उठता है...। बहुत भावप्रवण चोका...बधाई...।
सरस्वती जी के माहिया भी बहुत पसन्द आए...बधाई...।

प्रियंका

अनाम ने कहा…

आप सभी का माहिया पसंद करने के लिए दिल से बहुत- बहुत आभार !
डॉ सरस्वती माथुर

ज्योत्स्ना शर्मा ने कहा…

क्यों भर आईं
सबकी ये आँखियाँ
धन पराया
क्यों होती हैं बिटिया
क्यों दस्तूर बनाया ?....माँ ..और ..बिटिया दोनों को सामने ला खडा किया आपने ..और आँखे भीग गईं ...मन को छू लेने वाली प्रस्तुति ..
मधुर भावों से भरे माहिया के लिए सरस्वती जी को बहुत बहुत बधाई ..!!

amita kaundal ने कहा…

धन पराया
क्यों होती हैं बिटिया
क्यों दस्तूर बनाया ?
बहुत सुंदर प्रस्तुती है

काली ये रातें हैं
मन दीप जला के
करनी कुछ बातें हैं ।

सुंदर माहिया
सुंदर रचनायों के लिए हरदीप और सरस्वती माथुर जी को बधाई
सादर,
अमिता कौंडल

shashi purwar ने कहा…

sindhu ji ka tanka bahut pasand aaya , beti ke yah kahs pal ,har ma ke dil ki dastaan hai .

saraswati ji ke mahiya bahut pasand aaye .badhai aap dono ko