गुरुवार, 4 अक्तूबर 2012

नया घोसला /जलपरी



1-नया घोसला- डॉ जेन्नी शबनम
प्यारी चिड़िया 
टुक-टुक देखती  
टूटा घोसला 
फूटे जो सारे अंडे
सारे के सारे 
मरे अजन्मे चूजे
चीं-चीं करके
फिर चिड़िया रोती
सहमी हुई  
हताश निहारती  
अपनी पीड़ा 
वो किससे बाँटती
धीर धरती 
जोड़-जोड़ तिनका
बसेरा बसा 
कितने बरस व 
मौसम बीते
अब सब बिखरा 
कुछ न बचा 
जिसे कहें आशियाँ,
बचे न निशाँ
पुराना झरोखा व
मकान टूटा 
अब घोसला कहाँ ?
चिड़िया सोचे -
चिड़ा जब आएगा 
वो भी रोएगा 
अपनी चिड़िया का
दर्द सुनेगा,
मनुष्य की क्रूरता 
चुप सहेगा 
संवेदना का पाठ 
वो सिखाएगा !
चिड़ा आया दौड़ के 
चीं-चीं सुनके
फिर सिसकी ले के 
आँसू पोंछ के 
चिड़ी बोली चिड़े से -
चलो बसाएँ 
आओ तिनके लाएँ 
नया घोसला 
हम फिर सजाएँ
ठिकाना खोजें 
शहर से दूर हो 
जंगल करीब हो !
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2-जलपरी- तुहिना रंजन

झिलमिलाते 
सितारों से  सजने 
वो जलपरी 
जल -जीवन छोड़ 
उड़ने चली 
सपनों के पंख ले 
गगन पार 
बादलों पे सवार 
आँसू बहाता 
सागर पुकारता 
दिल का दुःख 
लहरों में छुपाता 
छाती पीटता 
तट से टकराता 
हवा के संग 
भेजता उस तक 
बूँदों की पाती 
नीर में भर पीर 
तकता राह 
करता इंतज़ार 
बाँहें  फैलाए 
फिर एक समय 
कुछ यूँ हुआ 
छटपटाती 
घायल हिरनी -सी 
आकर गिरी 
जल को तरसती  
समुन्दर में 
लिपटी लहरों से 
जैसे जी गयी 
सागर में मिलके 
पी में समाई 
जीना किसके संग 
सीख यही पा गई 
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10 टिप्‍पणियां:

shashi purwar ने कहा…

bahut sundar tuhina ji ka chkoka bahut prabavit kar gaya , badhai dono eachnakaro ko

ज्योत्स्ना शर्मा ने कहा…

बहुत मर्मस्पर्शी रचनाएँ हैं ...
शहर से दूर हो
जंगल करीब हो !...और ...

जीना किसके संग
सीख यही पा गई ...पंक्तियाँ बहुत कुछ कह गईं ..बहुत बधाई ..

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

दोनो चोका बहुत मर्मस्पर्शी ! दिल भर आया !
~सादर !

Anupama Tripathi ने कहा…

वाह ...दोनों रचनाएँ शानदार ....!!आसान नहीं है इस तरह से भावनाओं को पिरोना ''चोका'' मे .....मुश्किल काम भी इतना खूबसूरत बन पड़ा है ...!!

नया घोंसला भी और जलपरी भी ...बहुत बधाई जेन्नी जी और तुहिना जी ...!!

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

सुन्दर चोका है...।
जेन्नी जी की ये लाइनें तो कितना कुछ कह गई...
नया घोसला
हम फिर सजाएँ
ठिकाना खोजें
शहर से दूर हो
जंगल करीब हो !

तुहिना जी का चोका सच में बता गया-किसके संग जीना सार्थक होता है...।
आप दोनो को बहुत बधाई...।
प्रियंका

Rachana ने कहा…

नया घोसला
हम फिर सजाएँ
ठिकाना खोजें
शहर से दूर हो
जंगल करीब हो !
kash aesa ho ham kuchh prakriti ke pas hoon

सागर में मिलके
पी में समाई
जीना किसके संग
सीख यही पा गई
yahi to niyat hai jeevan bhi kuchh aesa hi hai
aapdono ko bahut bahut badhai
rachana

Krishna Verma ने कहा…

मार्मिक रचनाओं के लिए आप दोनो को बधाई।

Dr.Bhawna ने कहा…

Dono hi choka gahan,gambheer soch ka prateek hain.yun hi likhte rahiye shubhkamnayen...

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…
इस टिप्पणी को लेखक ने हटा दिया है.
डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

मेरे चोका को पसंद करने के लिए आप सभी की ह्रदय से आभारी हूँ. तुहिना जी को सुन्दर चोका के लिए बधाई.