गुरुवार, 4 अक्तूबर 2012

ओ भाव मेरे !




ताँका
1-डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
1
सुनो हो तुम
तुम से भिन्न मेरी
कहाँ व्याप्ति
जो तुम हो समय
संग मैं तुम्हारी गति
 2
 यादें तुम्हारी
मधुर रागिनी सी
मिलीं शब्द से
और अंकित हुईं
ज्यों काम और रति
3
तुम्हीं काव्य में
जो अमर छंद हो
ओ भाव मेरे !
वहीं मैं भी मिलूँगी
हाँ ,बन कर यति
4
बस पावनी
मैं रहूँ वन्दना सी
हे देव मेरे
रहे अस्तित्व मेरा
बन तेरी आरती
5
मेरी प्रीत हो
परिचय हो मेरा
मेरे मीत हो
राग मन वीणा के !
मैं हूँ तुम्हारी सखी ।
-0-
2-सुशीला शिवराण
1
छोटी ज़िंदगी
भर दें खुशियों से
हम सबकी
कर स्नेह बौछार
पाएँ हर्ष अपार।
2
कटते वृक्ष
सूखती हरियाली
छिनते नीड़
छिनती प्राण वायु
बढ़ती जग पीड़ ।
3
सुहानी भोर
खिड़की पे चिरैया
पूछती मोसे
काहे को छीना नीड़
क्या तोहे बैर मोसे ?
4
फूलों का साथ
जीत में जयमाल
चढ़ें देवल
बनें प्रेम की भाषा
अंतिम-यात्रा साथ ।
5
क्यों है दारु
मानव का जीवन
विक्षिप्‍त क्यों है
तेरी श्रेष्‍ठ रचना
ओ दरिद्रनारायण !
-0-
3-कृष्णा वर्मा 
1
दीप्त कर लें
अँधेरी राहों को ज्यों
नन्हें जुगनू
रास्ते स्वयं चल दें
मंज़िलों की तरफ ।
2
प्रत्येक फूल
सुंदर मनोहारी
भाग्य अपना
कोई ईश चरण
कोई चढ़े मज़ार ।
3
रिश्ते नाम के
हैं केवल प्रपंच
जाने केवल
सामर्थ को तोलना
भावनाएँ बेमोल।
4
बेकार नहीं
अधूरी इमारतें
बसें परिंदे
आबाद हो जाते हैं
अधूरे स्वप्न लिये ।
-0-

12 टिप्‍पणियां:

shashi purwar ने कहा…

sabhi rachnakaro ko badhai , jyotsana ji ke bhav bahut hi sundar lage , badhai

Anita Lalit (अनिता ललित ) ने कहा…

सभी भावपूर्ण तांका !
~सादर !

रविकर ने कहा…

होय पेट में रेचना, चना काबुली खाय ।

उत्तम रचना देख के, चर्चा मंच चुराय ।

प्रियंका गुप्ता ने कहा…

बहुत मनोहारी तांका हैं...। सभी को बधाई...।
प्रियंका

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति... सुप्रभात!

Dr.Bhawna ने कहा…

riston,prkrati ko khub darsaaya hai...hardik badhai...

सुशील कुमार जोशी ने कहा…

बहुत सुंदर !!
एक से बढ़कर एक !

Dr. sandhya tiwari ने कहा…

sabhi rachnayen sundar hain

रश्मि शर्मा ने कहा…

सुहानी भोर
खिड़की पे चिरैया
पूछती मोसे
काहे को छीना नीड़
क्या तोहे बैर मोसे .....वैसे सभी रचनाएं सुंदर हैं....

virendra sharma ने कहा…

त्रिवेणी
ताँका
डॉ ज्योत्स्ना शर्मा
1
सुनो हो तुम
तुम से भिन्न मेरी
कहाँ व्याप्ति
जो तुम हो समय
संग मैं तुम्हारी गति

ज्योत्स्ना शर्मा ने कहा…

आप सभी का ह्रदय से आभार ...!!

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

सभी ताँका बहुत भावपूर्ण. अप सभी को बधाई.